aznabi shaam..
कॉफ़ी के तो बहुत ठिकाने हैं, बस शाम ने ही बात करना छोड़ दिया हमसे..
ज़िन्दगी बस दौड़ते जा रही है, यूँ तो ढून्ढ रहे हैं हम खुदको कबसे|
-DT
कॉफ़ी के तो बहुत ठिकाने हैं, बस शाम ने ही बात करना छोड़ दिया हमसे..
ज़िन्दगी बस दौड़ते जा रही है, यूँ तो ढून्ढ रहे हैं हम खुदको कबसे|
-DT
हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं |
good one