bahak jana baki hai ( Ghazal )
चले जाना के अभी इस रात का एक पहर बाकि है ,
चले जाना के अभी इस दिल का एक अरमान बाकि है |
धड़कते दिल तड़पते है , मचलते दिल तरसते है ,
चले जाना के अभी इन सब का जल जाना बाकि है |
जिस दिल को संभाले थे , हमने उसको खोया है ,
चले जाना के अभी इस नुकसान का हर्जाना बाकि है |
तेरी आँखों के पैमाने पिए हमने नहीं पुरे ,
चले जाना के अभी किसी का बहक जाना बाकि है |
H.P.RAHI

हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं |
hiren sir,i liked this one alot…vese to apke sbhi sheyr achhe hain…keep on writing…we love to read ur shyri…