Archive for the ‘ My ’ Category
तेरी पहली शिकायत मुझसे , एक शरारत की तरह , मुझपे असर अब तलक , एक इनायत की तरह | [ READ MORE ]
कुछ इस तरह बह गए हम आखो से खू बनकर , तेरे तसव्वुर में रहते भी तो क्या महफूज़ होते ? [ READ MORE ]
हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं |