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रात की खामोशियों को सुनना हमको आ गया , वोह नदी कुछ यु बही कि सागर ही मिलने आ गया | [ READ MORE ]
हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं |