deewana ( shayri )
वो कहते है , ग़ज़ल से दोस्ती अच्छी नहीं “राही” ,
पर मैं अगर शायर न होता तो दीवाना होता | H.P.RAHI
वो कहते है , ग़ज़ल से दोस्ती अच्छी नहीं “राही” ,
पर मैं अगर शायर न होता तो दीवाना होता | H.P.RAHI
हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं |
wah re shyar deewana bhi tu banega
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