dil dil se ja mila ( Ghazal )

दिल दिल से जा मिला
जख्मो की फिकर है क्या

ना ज़माने की बात कर
तर्क-ए-दिल सुनेगा क्या

बेतकल्लुफ़ जो है आपसे
नज़रो की खता है क्या

हो गयी हर अदा बेहुनर
चिलमन को उठाया है क्या

एक वफ़ा एक अहद के सिवा
कुछ गरज़ दिल करे और क्या | H.P.RAHI

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