ek khayal

एक ख्याल ,
रोज आता है , दरवाजे खडखडाता है , पीछे देख के मुस्कुराता है , चला जाता है |
मैं बस एक हाथ उठा पाता हूँ ,
वोह उससे मिलने की तकलीफ भी उठाने नहीं देता ,
कहता है , लोगो के बीच हो , खुशनसीब हो ,
अभी रहो यही , मैं मिलूँगा तुम्हे पर अभी नहीं |

H.P.RAHI

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