hizr ( Shayri )
वोह जुबा पर क्यों ऐसे आता है ,
दिल जलाता है चला जाता है ,
उस दिलरुबा को जाने क्या कहिये ,
जो ख्वाब को भी हिज्र बना जाता है | H.P.RAHI
हिज्र – जुदाई |
वोह जुबा पर क्यों ऐसे आता है ,
दिल जलाता है चला जाता है ,
उस दिलरुबा को जाने क्या कहिये ,
जो ख्वाब को भी हिज्र बना जाता है | H.P.RAHI
हिज्र – जुदाई |
हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं |
hi hiren ..
nice one … par yeh हिज्र kya hota hai ??? baaki sab samaj aa gaya
@Jaspal Bhai maine waha par niche hi iska matlab bhi likha hai. main hamesha jo bhi urdu words hote hai unka hindi translation niche likhta hoo.
हिज्र – जुदाई |
दिल में हो जो वो ऐसे ही याद आता हैं,
ह़र उस पुरानी यादो को तजा कर जाता हैं,
कैसे कहते हो कि उसे भुला दिया तुमने ?
आज भी ख्वाबो में फिर वो क्यों आता हैं !