inayat ( Shayri )
तेरी पहली शिकायत मुझसे , एक शरारत की तरह ,
मुझपे असर अब तलक , एक इनायत की तरह | H.P.RAHI
तेरी पहली शिकायत मुझसे , एक शरारत की तरह ,
मुझपे असर अब तलक , एक इनायत की तरह | H.P.RAHI
हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं |
hmmmmmmmm menu pata hain…….
kiske liye likhi hai