khamkhwa ( Ghazal )

जब कभी ऐतबार होता है
इश्क़ का इम्तेहां होता है

सिलसिलो की सुनु या दिल की सुनु
रोज़ ही इंतेज़ार होता है

किर्चियां उड़ के चुभ न जाये कही
आईने है, अश्क कौन कहता है

ख़ामख्वा लिख रहे हो, राही
राज़ क्यों कर बयान होता है H.P.RAHI

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