woh kya raat thi ( Ghazal )

वो रात भी क्या रात थी ,
तुम थे और था चाँद थोड़ा थोड़ा |

कर रहे थे प्यार मुझको ,
और था इताब थोड़ा थोड़ा |

थोडी थोडी मुहब्बत थी और ,
था तेरा नखरा थोड़ा थोड़ा |

सारी छत पे थी खुशबू महकी ,
जो था तेरा इकरार थोड़ा थोड़ा |

इताब – गुस्सा |

H.P.RAHI

chalka chalka paimana ( Shayri )

यह झूठो की बस्ती है , यह मुर्दों का तहखाना है ,
इनसे क्या लेना देना मुझे , अपना हमदम तो विराना है |
अब साजे सागर क्या कहिये , छलका छलका पैमाना है ,
जो बीत गए वोह दिन थे मेरे , है शाम जिसे अब जाना है | H.P.RAHI

tere karam ( Shayri )

हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं | H.P.RAHI

aap hum me woh yarana woh muravvat kaha ( Ghazal )

रेत के महल बनते है सिर्फ़ टूटने के लिए ,
इनके इरादों में वोह माहो-साल कहा |
दे दो जवाब सवाल मुस्तकविल मेरे ,
आपके जिगर में वो हाल कहा |

हाले दिल भी कभी सुना होता ,
तड़प होती है क्या यह जाना होता |
करते थे तसल्ली किसी ज़माने में ,
दीद को भी अब वोह दीदार कहा |

भड़क उठते ये शोले कभी न बुझने को ,
जो कभी बेडियों में शबनम को बंधा होता |
अपनी चाहतो को करते खुल कर बयां पर ,
आप हममे वोह याराना वोह मुरव्वत कहा |

दीद – दर्शन ,मुरव्वत – लिहाज |

H.P.RAHI

yu rato me na milne aao ( ghazal )

मेरे मुफलिस तेरे ही दामन में सोया हूँ ,
ख़बर भी नही इतनी गुम हो , क्या मेरे ख्यालो में खोयी हो |

शब् भी बहोत लम्बी सी है ,
इसे तेरे आने की ख़बर है जो |

तन मन में इतना शोर मचा है ,
आज सिने में जैसे दो दिल हो |

तुमको रोकू पहरों पहरों ,
गर महताब पे बस चल जाए तो |

इस जालिम दिल को रोक सकू ,
यु रातों में न मिलने आओ तो |

मुफलिस – निर्धन , शब् – रात ,
महताब – चाँद |

H.P.RAHI

andaza ( shayri )

बहोत देर तक अंदाजा लगाते रहे ,
वोह आयेंगे किस ओर से दिल में ,
ज़िन्दगी ऐसे ही ख्याल बुनती रही ,
वोह आए और आकर चले गए ,
हम बस बहोत देर तक अंदाजा ही लगाते रहे |       H.P.RAHI

Numaeesh ( Ghazal )

रेगजारो के दिल की गुलिस्ता क्या जाने ,
बहोत से ख्वाब नुमाइश पर लगा आया हूँ |

दिल ता जिगर तेरी रहगुज़र का मुंतजीर सा हुआ ,
गाफिल वहा हर साँस भूल आया हूँ |

हर रंग मेरा कैस का हर रंग लगे ,
अपनी सूरत के कई नकाब गिरा आया हूँ |

मेरा परवर भी गमगुसार हुआ ,
तेरे फरेब पर एक गर्द बिछा आया हूँ |

रेगज़ार – रेगिस्तान , मुंतजीर – इंतज़ार करने वाला ,
गाफिल – बेहोश , कैस – मजनू , गर्द – धुल |

H.P.RAHI

Woh Khat ( Ghazal )

सुबह को तेरा ख़त जो मिला था ,
सहरा में इक फूल खिला था |

तेरी आँखें याद आई थी ,
मयखाने को भूल गया था |

अँधेरा ही हकीकत थी मेरी ,
कोई दीप ले आया वोह तेरा ख़त था |

शाम को मैं फिर मयखाने में हूँ ,
जो मिला था, तेरा कोई पुराना ख़त था |

सहरा – रेगिस्तान

H.P.RAHI

tareef ( Ghazal )

तेरी आँखों ने यह जो कह दिया ,
बस इसको ही मैंने शायरी नाम रख दिया |

तालियाँ बजी थी , तारीफे थी मेरी ,
तेरा नाम जो मैंने महफिल में कह दिया |

जिस रात दिखा था तेरा चेहरा ,
उस रात को मैंने चौदहवी कह दिया |

तुम भी बन जाओगे मशहूर शायर ,
मेरी तरह जो तुमने उनको सुन लिया |

H.P.RAHI

Deewanagi (Song)

उनकी एक अदा पर हम क्या कर गए ,
दीवानगी की हद से हाय गुज़र गए |

उनसे नज़रे मिले कब , दिल ये बातें सोचे अभी ,
इस आशिकी के रास्तो से, कैसे गुज़रे यह सोचे अभी ,
आँख भी ना लगे अब , कैसे कांटे यह राते सभी ,
नही होश में थे , कहा जा रहे थे ,
नही थी हमको ख़बर , क्यों गा रहे थे ,
के पागल हुए हम अभी , जो हदों से गुज़र गए |

उनकी एक अदा पर हम क्या कर गए ,
दीवानगी की हद से हाय गुज़र गए |

उनकी शोखियों से हम थे थोड़े अजनबी ,
वफाओ से टकरा गए हम , सोचे थे जो न कभी ,
क्या होती है मुहब्बत , यह हमने था न जाना कभी ,
यकीन पा रहे थे या शरमा रहे थे ,
सुकून मिल रहा था , जो दिल पा रहे थे ,
के बातें करते , मुस्कुराते , वादे कर गए |

उनकी एक अदा पर हम क्या कर गए ,
दीवानगी की हद से हाय गुज़र गए |

H.P.RAHI

One of My Favourite ( Ghazal )

शुक्रिया के हमारे अंजुमन में आप आए है ,

सब ओर बरस रहे है जलवे , के सरकार आए है |

तुम्ही से रोशन हर महफिल , तुम्ही से रोशन हर लम्हा ,

के आज की शब रौशनी में नहाने यहाँ महताब आए है |

सरफरोशी कि तमन्ना थी हमारे दिल में भी ,

मगर अब करेंगे गुलामी आपकी , के आप शम्मे बहार लाये है |

दास्ताने सिफर सुनाते थे जो पैमाने कभी ,

वोह आज ख़ुद नशे में डूबने कि गुहार लाये है |

अंजुमन – सभा , शब् – रात , महताब – चाँद , सिफर – शुन्य |

H.P.RAHI

My First Ghazal

सबकी सांसे सबका जीवन , मेरा जीवन तुम ही साजन |

मेरा क्या है , क्या मैं बताऊ , मेरा जीवन तेरा साजन |

भंवरा जैसे फूल बिना है , मेरा जीवन तुम बिन साजन |

देर लगी क्यो तुमको इतनी ,तेरी तलाश में भटका जीवन |

बहुत तलाशा मैंने इसको , तुझमे मिला है मेरा जीवन |

H.P.RAHI