parivartan ( shayri )
परिवर्तन मुझे कभी पसंद नहीं आया ,
यह बात अलग है के आदत पड़ ही जाती है कुछ रोज़ बाद ,
समय की चारागरी मुझ पर भी असर रखती है | H.P.RAHI
परिवर्तन मुझे कभी पसंद नहीं आया ,
यह बात अलग है के आदत पड़ ही जाती है कुछ रोज़ बाद ,
समय की चारागरी मुझ पर भी असर रखती है | H.P.RAHI
हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं |
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