Posts Tagged ‘ ghazal ’
हर नफस मेरी एक जलन , तु बेखबर , कितना धड़के दर्दे जिगर , तु बेखबर | एक जान मेरी , कब है मेरी , तु जाने न , तु बेखबर | तेरी एक नज़र , तीरे नीमकश , तेरे दीद का इतना असर , तु बेखबर | गाफिल “राही” , एक ही तरफ , [ READ MORE ]
उठा धुआ तक नहीं जब दिल ये मेरा खाक हुआ , तेरी शान में गुस्ताख थी चिंगारी , जो सजा ए बेनूर हुयी | कातिल का पता जानते हो तो पूछते क्यों हो , ए दर्दे जिगर मेरे, सो जाओ के बहोत देर हुयी | शबे फुरकत में रिंद , बहोत पीना नहीं अच्छा , [ READ MORE ]
लम्हा लम्हा जिंदगी के आशियाने बीत गए , दीवानगी में बेखुदी के वो ज़माने बित गए | ले जा रहे हो क्या यहाँ से ? क्या मिला होगा तुम्हे ? दीदावारे हुस्न के , मयकशी के , वोह ठिकाने बित गए | जर्रा जर्रा जोशे जूनून खो गया , गुम हो गया , ए दिल [ READ MORE ]
गुमनाम बहारो की गुमनाम मजारे है , बरबस ही मिले है जो , गुमनाम सहारे है | छुपते हुए देखा है हमने कुछ अपनों को , महरबान अंधेरो में महरबान दरारे है | इक आह सी उठती है , एक दर्द सा जाता है , बेईमान किरदारों के बेईमान नज़ारे है | रोते हुए पाया [ READ MORE ]
अरसा बिता है किसी की याद सताए हुए , अब भी रखता काश मैं तूफान जगाये हुए | उसकी सोहबत में नज़ारे हसीन लगते थे , उसके पहलु में मुझे चाँद सितारे करीब लगते थे अब तो जैसे सन्नाटो के शोर गूंजते रहते है मुझको भी तो युग बीते आवाज़ लगाये हुए अजीब दौर था [ READ MORE ]
एक सपना देखा , कितना वोह अच्छा सपना था | कुछ अपना भी देखा था , कितना वोह सच्चा अपना था | ख़त कितना सुहाना था , कागज कुछ पुराना था , कुछ धुंधला सा कुछ उभरा सा , वोह तेरा इकरारनामा था | बहता बहता एक आसू आया , पोछ गया कुछ स्याह को [ READ MORE ]
एक ख्वाब की बख्शीश को संभाले , फिर नयी फुरसते … घूमते रहें एक रात ओढ़े हुए चुपके से , यादो की गलियों से कुछ कदमो के निशान चुराए | फिर नयी फुरसते… चाँद बांधे मुट्ठी में तारो से जगडा किये , कुछ टुकड़े चांदनी के धुप में सुखाये | फिर नयी फुरसते… फिर उन्ही [ READ MORE ]
शाम , पलकों में डूबी एक किताब सी लगती है , पत्तो पे जिसके ढलकी , शायद कुछ शराब सी लगती है | शाम , घायल अश्को से भी घायल लगती है , गहराई से देखा तो यह एक हिसाब सी लगती है | शाम , पागल दिल सी पागल , किसी बोजिल शबाब सी [ READ MORE ]
चले जाना के अभी इस रात का एक पहर बाकि है , चले जाना के अभी इस दिल का एक अरमान बाकि है | धड़कते दिल तड़पते है , मचलते दिल तरसते है , चले जाना के अभी इन सब का जल जाना बाकि है | जिस दिल को संभाले थे , हमने उसको खोया [ READ MORE ]
सहर तक आते आते हर पल को गिनता रहा , मेरे दिल अजीज एक ख्वाब ने सताया बहोत मुझे | कभी कभी अपने भी जरा कुछ काम आ जाते है , मेरी ग़ज़ल से टूटकर एक हर्फ़ ने सिखाया बहोत मुझे | एक हवा रोज आखो में आ जाती है कुछ तिनके लेकर , मेरे [ READ MORE ]
तेरी बाहे सुनी राहें छोड़ कर जा चुकी होंगी , कही तो आग लगी होगी , कही बरसात हुई होगी | रहा करते थे जिनकी धडकनों में हम , तडपता छोड़ कर जाना उनकी आदते होंगी | उन्हें हम ग़म के मारो का मसीहा कहते फिरते थे , के मसीहा बन के तरसाना उनकी ख्वाहिशे [ READ MORE ]
मेरा कम नहीं है हौसला , न यु अदा से मिला करो , मेरे घर में भी है आइना , न नज़र से इतनी दुआ करो | मुझे ग़म नहीं किसी और का , जैसी भी यह ज़ीस्त सही , मुझे कह दो बेवफा मगर , न इस तरह से वफ़ा करो | सौ बार [ READ MORE ]
एक ‘राही’ भुला भटका सा , दो चार कदम पर मंजिल क्या , यह बहोत आम सी जिंदगी , एक उम्र जिए तो जिए ही क्या | हर शाम थकी इन राहो को मैं घर की राह दिखाता हूँ , कुछ करने की यह जिद ही सही , दो ख्वाब ही देख लिए तो क्या [ READ MORE ]
हर तरफ हर वक़्त धुआं सा रहता है | एक धुप का टुकडा डरा सा रहता है | जब भी गुज़रा मैं जली इन बस्तियों से , तजरूबा मेरा बुरा सा रहता है | आपके शहर से दोस्ती हो कैसे , हर शख्स कितने शख्स बना सा रहता है | जिन्दगी एक तपिश सी क्यों [ READ MORE ]
दबे दबे से गीत के पीछे जाने क्या राज है , क्या तुम्हारा प्यार मेरे लिए अब बिना परवाज है | आज दर पर आहट हुयी , पर कुछ रौशनी न हुयी , दिल तक न पहूची यह तुम्हारी कौनसी आवाज है | जानते है यह संसार है नापाक तो होगा ही , पर हमारे [ READ MORE ]
कारवा गमो का गुजरा था मेरे दर से , हमारे हाथो से सागर टूटने से लगे है | तुम्हारी दुआए हम तक पहुची ही थी , जिंदगी और मौत के सिरे छुने से लगे है | भीगने लगी है जिंदगी की राहें , दिलो के जख्म सुबकने से लगे है | अपने अंजुमन में क्या [ READ MORE ]
मेरी तन्हाइयो का साथी मुझको मिल गया , तिशनगी थी इतनी कि सारा मयकदा मैं पि गया | मेरी पहचान का कोई काफिला गुजरा था मेरे दर से , शहनायिओ कि आवाज थी कि मैं सारी रात जी गया | था नहीं यकीन कि इस तरह से गुजरोगी तुम मेरे सामने से , उस यकीन [ READ MORE ]
वोह यार मेरा दिलदार मेरा कुछ अनसुना सा हो गया , जल गए हम भी कसक में , वोह दिलजला सा हो गया | जब समंदर से मैं गुजरा साया अपना खो गया , जिसकी तलाश में था मैं भटका , ये सहरा पासवा सा हो गया | उस किरण का था ये वादा , [ READ MORE ]
कैसे रहोगे तन्हा हम बिन , जी न सकेंगे हम भी तुम बिन | दिल पर बोझ यादो का इतना , मर भी सकेंगे कैसे तुम बिन | शाम तो कट ही गई पीते पीते , जाने कैसे कटेगी यह रात तुम बिन | ‘राही’ भूल रहा है अपनी मंझिल , बदले बदले से जो [ READ MORE ]
वो रात भी क्या रात थी , तुम थे और था चाँद थोड़ा थोड़ा | कर रहे थे प्यार मुझको , और था इताब थोड़ा थोड़ा | थोडी थोडी मुहब्बत थी और , था तेरा नखरा थोड़ा थोड़ा | सारी छत पे थी खुशबू महकी , जो था तेरा इकरार थोड़ा थोड़ा | इताब – [ READ MORE ]