badastoor

जब पिघलता हुआ रोशन सितारा
अपनी आखरी चाल चलता है , खूनी बाज़ी लगाता है
और हार जाता है आसमानी समंदर से हर बार
डूब जाता है

जब शाम ढले साये घर लौटते वक़्त
धुंधले धुंधले निशान आवाज़ों के छोड़ जाते है
रात वो सारे बटोर लेती है
ईंधन जमा करती है

जब रातो के सन्नाटो में
दो जिस्म उबलते है , पिघलते है
एक नयी कहानी बुनते है
सुबह तलक उफ़क पे उकेरते है

हर रोज़ एक नयी परवाज़ लिए
नन्हे परिंदे अपनी शाखों से दूर
क्षितिज की आग़ोश में जाते है
उम्मीद एक और नए दिन की लिए

सहराओ में रेत के दरिया है
जो ठहरे हुए भी बहते से लगते है
जाने किसकी आमद के इंतज़ार में वहा
समय पड़ा हुआ दोपहर काटता है

जब उजाले चीखते है
टुकड़ा टुकड़ा होकर ज़मीन बिखर जाती है
एक कतरा अब्र की तलाश में
निगाहें शाम तलक सिर्फ धोखा खाती है

क्रम जारी है बदस्तूर यही सदियों से
सदियों का ये खेल बहोत निराला है |

H.P.RAHI

ek khayal

एक ख्याल ,
रोज आता है , दरवाजे खडखडाता है , पीछे देख के मुस्कुराता है , चला जाता है |
मैं बस एक हाथ उठा पाता हूँ ,
वोह उससे मिलने की तकलीफ भी उठाने नहीं देता ,
कहता है , लोगो के बीच हो , खुशनसीब हो ,
अभी रहो यही , मैं मिलूँगा तुम्हे पर अभी नहीं |

H.P.RAHI

aag ho jaye ( Ghazal )

ज़माने से कुछ तो सवाब हो जाये
दीवाने का इश्क़ में मुकाम हो जाये

कई रोज़ हो गए है तमाशा गुज़रे
चर्चा-ए-सरे-आम का इन्तेज़ाम हो जाये

शर्त ये थी के ख़त्म न होंगे
ज़ुल्म तेरे सभी शराब हो जाये

तुझको इतनी तो खबर रही होगी
ये पयामो की आरज़ू थी, आग हो जाये । H.P.RAHI

dil dil se ja mila ( Ghazal )

दिल दिल से जा मिला
जख्मो की फिकर है क्या

ना ज़माने की बात कर
तर्क-ए-दिल सुनेगा क्या

बेतकल्लुफ़ जो है आपसे
नज़रो की खता है क्या

हो गयी हर अदा बेहुनर
चिलमन को उठाया है क्या

एक वफ़ा एक अहद के सिवा
कुछ गरज़ दिल करे और क्या | H.P.RAHI

raaj ( Ghazal )

आप हमसे यु खफा होते है
महफ़िलो में भी कही राज़ बयां होते है

मेरी नज़्मों में उन आँखो का ज़िक्र रहता है
मयकदो के यु सभी क़र्ज़ अदा होते है

तेरी जानिब कुछ फासले सा बढ़ता हूँ
सूखे हुए फूल जब किताबो से रिहा होते है | H.P.RAHI

yaad aaya na karo ( Ghazal )

तुम इतना मुझे याद आया न करो
दिल बड़ा कमजोर है, इस तरह बुलाया न करो

साँसों का सफ़र बाकि है ज़रा सा ही और
उन पुराने वास्तो की धूल यु उडाया न करो

क़र्ज़ रातो के अभी बाकि है बहोत सारे
आकर यु ख्वाबो में तुम मुझको जगाया न करो

मेरी गजलो के हर्फ़ है सब हाँफते हुए,
ये बाते तुम युही हँसी में उड़ाया न करो | H.P.RAHI

tumne kab se sikh liya ( Ghazal )

तुम तो मेरे थे हमेशा , क्या गज़ब तुमने किया
लोगो की बातों में आना , तुमने कब से सिख लिया

एक करम की थी गुज़ारिश , एक रहम की थी उम्मीद
आ के तेरे शहर में , क्या गलत हमने किया

कितने मयखाने जले और कितनी सदियों के जगे
क्या रखे इनका हिसाब , जो दिया तुमने दिया

शाम के पतजड़ बीने थे मौसमो की याद में
रात की बारिश ने सब तिनको को फिर तूफां किया ।

H.P.RAHI

karz ( Ghazal )

मौसमें गुल है अभी इसको गुज़र तो जाने दो
ऐ बहारो मुझको मेरे माज़ी से मिल जाने दो

आसमानो से परिंदे अलविदा कहते किसे है
जंगलो के राज है सब राज ही रह जाने दो

तेरे शहर के बाशिंदे कुछ मेरे गाँव में ठहरें हुए है
सितारो बादलो से निकलो ज़रा कुछ रोशनी हो जाने दो

सहराओं के कर्ज़ कितने थमती थमती साँसो पे है
जागती आखों के सागर कुछ छलक तो जाने दो ।

H.P.RAHI

dil karta hai ( Nazm )

लहू दिल से खरोंच लू
दिल करता है
क़त्ल हो जाना मुश्किल है
कौन कहता है ?
टूट के बिखर जाये कभी
उस दहलीज़ पे जाकर
रश्क हो जाये उन्हें मुझपे
मन होता है |
बेशुमारी शामिल थी
हर चीज़ में अपनी
बेहयाई भी होती कुछ
कितना सहता है ?

H.P.RAHI

jalte hue khat ( Ghazal )

दिलजले दिल यु खुदाओं की खुदाई रोए
जलते हुए खत ज्यो असीरी की रिहाई रोए

दर्द-ए-चारागिरी तो वस्ल-ए-मयख़ाने में थी
और हम बस एक मुलाक़ात की दुहाई रोए

तजरूबा खूब रहा उल्फत-ए-मुसीबत का
लोग क्यों खाम्ख्वा यार-ए-जुदाई रोये

जाने कितने हिसाब होने को थे लेकिन
जिंदगी बस वक़्त को ही गवाही रोये |

असीरी – कैद , चारागिरी – इलाज़ , वस्ल – मिलन

H.P.RAHI

siyasat ( Ghazal )

कुछ वबा सी हर ओर महक रही है
मेरे वतन में आजकल सियासत उबल रही है

कई से बा-अदब , कई से बे-अदब
आबरू ए हर आम उछल रही है

कुछ तख़्त नशीनो से कुछ तख्ते आशिक़ों तक
रोज़ खैरातें तिलिस्म बट रही है

कौन जागे , क्यों ही जागे , क्या पड़ी है
जिंदगी को सब तजुर्बा है , सो चल रही है ।

वबा – महामारी , सियासत – राजनीती , बा-अदब – इज्जत के साथ, बे-अदब – बेइज्जती के साथ , तख़्तनशीन – गद्दी पर काबिज

H.P.RAHI

Tera Sath

Wrote for the dearest friend Vishal Chaudhary on his Engagement –

वक़्त गुज़रता रहा जैसे
शिद्दत और बढ़ती रही वैसे
एक जूनून हो गया था तुझे पाना
आज जब वोह ख्वाब मुकम्मिल हुआ
तो लगा जैसे जूनून ख़तम नहीं हुआ
शिद्दत अभी पूरी नहीं हुई , और भड़की है
जैसे शोलो को हवा दे दी हो किसी ने
यह मंज़िल नहीं है मेरे लिए
रास्ता अभी और भी है
बस अकेले चलना मुनासिब नहीं था
तेरा साथ मिला तो लगा जैसे
मुश्किलें कम तो नहीं पर आसान हो गयी है ।

H.P.RAHI

nira chand

इतना आसान नहीं लहू रोना
दिल है जो धड़कने का सबब जानता है
क़त्ल हो जाता जमानो पहले
ये निरा चाँद मगर कब मानता है

H.P.RAHI

furqate yaar hai ( Ghazal )

फुरक़ते यार है , दिल कैसे भुलाओगे उन्हें
यु खुले जख्म , भला कैसे छुपाओगे उन्हें

ऐसे बिखरे है फिज़ाओ में जफ़ाओ के समां
जैसे सहराओ में भटकी हुई गुलशन की दुआ
जैसे छिल जाते है जिस्मो में उम्मीदों के निशां
कितने वादों के सिले कैसे निभाओगे उन्हें
फुरक़ते यार है

टुकडो टुकडो में बटी फिरती है हर रात यहाँ
जैसे काटे नहीं कटती कभी माज़ी की खिज़ा
जैसे होती ही नहीं उम्रे अज़ाबो से रिहा
क्या पुकारेगी सदा क्या ही सुनाओगे उन्हें
फुरक़ते यार है

फुरक़त – विरह , जफा – अन्याय , सहरा – रेगिस्तान , माज़ी – अतीत , खिजा – पतझड़ , अज़ाब – दुःख

H.P.RAHI

daur

दौर वो भी था
दौर ये भी है
कल भी गुज़रा था
आज भी कहा ठहरा है
रात की खामोश निगाहें
बस सुबह तलक जागेंगी
फिराक है फिराक ही सही
गमे यार के चंद रोज़ा
उम्र तलक क्या साथ आयेंगे
ज़िन्दगी रिंदगी से बहोत अलग होती है
तुम भी जानते हो तुमको भी खबर है
बस एक गर्द सी तुमने बिछा रखी है
जब भी साँस आये , या जिंदा हो आओ तुम
तो मुड के देखना पीछे
तुम्हारी बस एक नफ़स से उड़े गर्दे गुबार के सिवा
कुछ नज़र शायद ही आये तुम्हे ।

H.P.RAHI

furqate-e-yaar ( Shayri )

नज़्म कुर्बान कर दी , बस एक रात के लिए ,
नींद खा जाती , कागज़ पे जिंदा उतर आती जो ,
नज़्म का क्या है , कल फिर रूबरू हो आएगी ,
फुरकते यार है , नींद कहा रोज आएगी ।

H.P.RAHI

tasavvur ( Ghazal )

गुमशुदा मिल गया वजुद मेरा ,
सरे राह जो खोया था जानशीं मेरा ।

तिरे जहां में कुछ तो मिला मुझे ए खुदा ,
वोह तसव्वुर के इरादों का नज़ारा मेरा ।

बंदिशे इश्क फ़साने को जाने क्या कहिये ,
बंदिशों का करम ही तो है मुकद्दर मेरा ।

तुमको देखे के शबे आफताब देखे ,
क्या क्या नहीं है आज जमाना मेरा ।

ख़ुशबुओ की चमन को आहट है ,
सुनते रहिएगा आप आज फ़साना मेरा ।

रूबरू देखा जो सहरा-ओ-समंदर मैंने ,
याद आ गया वोह मिलन था जो तुम्हारा मेरा ।

H.P.RAHI