Posts Tagged ‘ shayri ’
उठी वोह नज़र के बहोत इब्तेदा से यु , अशआर बने ग़ज़ल और ग़ज़ल किताब हुयी |[ READ MORE ]
वो कहते है , ग़ज़ल से दोस्ती अच्छी नहीं “राही” , पर मैं अगर शायर न होता तो दीवाना होता | [ READ MORE ]
जफा की राह में हम तो वफाओ से गए , दिलजलो से मिल गए और दिल जला के आ गए | [ READ MORE ]
तेरे दरे आस्ता , सबब बेकसी मेरी , गर मैं तेरी जरूरत नहीं , तो तेरा शौक ही सही | [ READ MORE ]
हाय उल्फत ए मुसीबत, जब भी पड़ी , भारी पड़ी , तुम तो आखिर तुम ही थे , हम ही हम न रहे | [ READ MORE ]
रात की खामोशियों को सुनना हमको आ गया , वोह नदी कुछ यु बही कि सागर ही मिलने आ गया | [ READ MORE ]
हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं |