uuns ( Shayri )

उन्स उठते है तो जिगर के छाले मेरे रो पड़ते है ,
के आग बुझाकर मैं उनपे राख मल देता हूँ ,
मेरी जिंदगी का रंग बहोत धूसर सा लगता है मुझे | H.P.RAHI

hizr ( Shayri )

वोह जुबा पर क्यों ऐसे आता है ,
दिल जलाता है चला जाता है ,
उस दिलरुबा को जाने क्या कहिये ,
जो ख्वाब को भी हिज्र बना जाता है | H.P.RAHI

हिज्र – जुदाई |

manhusiyat ( Shayri )

वोह रहगुज़र मेरी रहगुज़र रहे ,
साथ चलने से कुछ इत्तेफाक हो जाते है |
अपनी मनहूसियत की चर्चा करता फिरता हूँ ,
साथ चलने वाले कुछ करम कर जाते है |H.P.RAHI

jangju ( Shayri )

कहा टिकता है कोई जर्रार मेरे सामने , आज दिल जंगजू बहोत है |
रहेगा आसमान भी मेरे कदमो तले , आज परवाज बुलंद बहोत है | H.P.RAHI

जर्रार – बहोत बड़ी सेना , परवाज़ – उडान |

jaroori to nahi ( Shayri )

देखना चाहे कोई उनको तो हर जगह देखे ,
पर हर नजारे की नज़र हो यह जरूरी तो नहीं |
उनकी आँखों के निशाने से ही मर जाए लेकिन ,
उस निशाने पर यह दिल हो यह जरूरी तो नहीं |H.P.RAHI

ummeede mitati chali gayi ( Shayri )

wrote after getting harassed with kota exeperience.

उम्मीदे मिटती चली गयी , रास्ते जलते चले गए ,
जिंदगी का सफ़र चल न पाए हम , हर दिन हर रात मरते चले गए |
उफनती नदिया सागर सी लगने लगी , सुखी हुयी नहरे सहरा सी लगने लगी ,
बिगडे आसान काम भी , हम खुद को ठगते चले गए |H.P.RAHI

सहरा – रेगिस्तान |

chalka chalka paimana ( Shayri )

यह झूठो की बस्ती है , यह मुर्दों का तहखाना है ,
इनसे क्या लेना देना मुझे , अपना हमदम तो विराना है |
अब साजे सागर क्या कहिये , छलका छलका पैमाना है ,
जो बीत गए वोह दिन थे मेरे , है शाम जिसे अब जाना है | H.P.RAHI

tere karam ( Shayri )

हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं | H.P.RAHI

andaza ( shayri )

बहोत देर तक अंदाजा लगाते रहे ,
वोह आयेंगे किस ओर से दिल में ,
ज़िन्दगी ऐसे ही ख्याल बुनती रही ,
वोह आए और आकर चले गए ,
हम बस बहोत देर तक अंदाजा ही लगाते रहे |       H.P.RAHI