uljhan
कुछ अरसा बीत गया है..कुछ लम्हे रह गए हैं..
जाने इस ख़ामोशी में हम क्या कह गए हैं..
सुनते आये हैं लोगो से अक्सर ये हम..
वक़्त की करवट में बहुत दम है..
वक़्त ने बदल डाला इतना कुछ…
हम नहीं जाने, हम बदले या वही रह गए हैं|
DT
कुछ अरसा बीत गया है..कुछ लम्हे रह गए हैं..
जाने इस ख़ामोशी में हम क्या कह गए हैं..
सुनते आये हैं लोगो से अक्सर ये हम..
वक़्त की करवट में बहुत दम है..
वक़्त ने बदल डाला इतना कुछ…
हम नहीं जाने, हम बदले या वही रह गए हैं|
DT
हमारे गुनाहों की दास्ताँ लिख रहा हूँ मैं ,
कभी जीत तो कभी हार लिख रहा हूँ मैं ,
मेरे गुनाहों को माफ़ करने वाले ,
मुझ पर कर न सके जो तुम , वोह करम लिख रहा हूँ मैं |
Bahot bahot jyada badhiya .
कुछ अरसा बीत गया है..कुछ लम्हे रह गए हैं..
जाने इस ख़ामोशी में हम क्या कह गए हैं..
सुनते आये हैं लोगो से अक्सर ये हम..
वक़्त की करवट में बहुत दम है..
वक़्त ने बदल डाला इतना कुछ…
हम नहीं जाने, हम बदले या वही रह गए हैं|
yaar isake baad alfaaz nahi kahane ko, very good ………….