aapbiti

रोने दो ना ,
नज़र उठा के देखा तो को दरवाज़े में चटखनी नहीं थी ,
बंद नहीं होता है साला , अब रोऊ कैसे ?
गला सुख रहा है ,
फ्रीज़ खोल कर देखा ,
तो पानी की एक बूंद तक न थी ,
बस २ बीयर की बोटल , भरी हुयी |
पिने दो ना |
कंप्यूटर पे बैठा हूँ मैं इस वक़्त ,
उस फोल्डर तक ना जाने कैसे , लेकिन पहोच गया ,
जहा पर कैद है एक हिडन जुस्तजू-ए-जिंदगी ,
डिलीट तक हड्डिया जाती नहीं ,
प्लीज़, रहने दो ना |H.P.RAHI

Leave a Reply

Your email address will not be published.