dastak

पुरानी यादें जब किसी दिन युहीं दरवाजा खटखटाती हैं..
न जाने क्या जादू है इनमें, बैठे बैठे कहीं और ले जाती हैं..
किसी पुराने यार, मंज़र या इश्क़ के पास..
कुछ तो मिल जाता है जो बहुत हो ख़ास..
तो बस फिर क्या सोचना है.. ऐसे ही यादें बनाते जाइये..
जी खोल कर आज इस पल को जीते जाइये..
क्या पता, कल दरवाजे पर फिर कोई दस्तक हो|

+ Divye

pehchan..

मैं हवा हूँ..या हूँ माटी?

मैं हूँ जीवन..या हूँ काठी?

मैं ख्याल हूँ..या हूँ सपना?

मैं पराया हूँ..या हूँ अपना?

मैं स्पर्श हूँ..या हूँ चुभन?

मैं मुट्ठी हूँ..या हूँ गगन?

मैं हंसी तेरी..या नमकीन जल?

मैं ज़िन्दगी तेरी..या बस इक पल?

तू जानती नहीं मुझे..या में तुझसे बना?

हर पल है मेरा..कुछ अर्थ नया।

 

– DT

ये रंग रंगीली दुनिया

इस रंग रंगीली दुनिया में, हर इन्सां है बदरंग
फिर भी देख ऐ मन बावरे, हर कोई खेले है सतरंज
सुना बहुत है, है दुनिया कोई इश्क वालों की, जहाँ है सुकूं
यहाँ तो बस करते देखा इन्सां को अपनों का ही खूं
क्या सच है और क्या है भरम, ये कौन है बता पा रहा
हर जगह देखो इक कठपुतली, इक कठपुतली है नचा रहा।

– DT

pata na chala..

इक तेरे इंतज़ार में दर पे दिया जलाये बेठे हैं..
इंतज़ार कुछ इतना हुआ, हुआ दिया हवा पता न चला..
लोग कहते हैं वो न आयेंगे कभी..
ऐसा क्या गुनाह हुआ, हुआ जो पता न चला|
ज़िन्दगी चल रही, कट रही है शायद.
तेरी याद में तेरे इंतज़ार में..
बदला नहीं कुछ भी तेरी गैरमौजूदगी में
बदला जो हुआ तो पता न चला||
DT

tu hai tu kahin to hai

तू है तू कही तो है..या ये सिर्फ तेरी आस है
तू है तू कहीं तो है..लगता है तू आस पास है
तू है तू कहीं तो है.. मेरा एक एहसास है
तू है तू कहीं तो है..इक तू ही तो मेरी ख़ास है|
DT

ik baat..

जिनकी बात, जिनसे बात, थी रोज़ कि बात..
उनसे दुआ सलाम का ठिकाना नहीं..
जिनसे बात करते है हम आज रोज़..
क्या वो भी वक़्त के कुछ लम्हे हैं?
DT

aznabi shaam..

कॉफ़ी के तो बहुत ठिकाने हैं, बस शाम ने ही बात करना छोड़ दिया हमसे..
ज़िन्दगी बस दौड़ते जा रही है, यूँ तो ढून्ढ रहे हैं हम खुदको कबसे|

-DT

baras..

बरस बरस के बरस गया..
तुझसे मिलने को दिल तरस गया..
जानता हूँ आस पास ही है तू कहीं..
युहीं बीत जाता है एक बरस नहीं..
नजदीकिया नहीं अब मुझे तू साथ दे..
जिसके लिए हूँ तरसा अब वो मुलाक़ात दे|

DT

uljhan

कुछ अरसा बीत गया है..कुछ लम्हे रह गए हैं..
जाने इस ख़ामोशी में हम क्या कह गए हैं..
सुनते आये हैं लोगो से अक्सर ये हम..
वक़्त की करवट में बहुत दम है..
वक़्त ने बदल डाला इतना कुछ…
हम नहीं जाने, हम बदले या वही रह गए हैं|

DT

thts time..

सोचता हूँ ना सोचेंगे अब तुम्हें
हर चीज तेरी याद दिलाती है
जिस हंसी के लिए ज़िन्दगी थी हमारी
आज वही हंसी हमें रुलाती है|

DT

kaise..

पल पल याद का एहसास उन्हें दिलाएं कैसे
अपने ख्यालों की तस्वीर उन्हें दिखाएं कैसे
उनसे मिलने के बाद जुदाई को समझा है हमने
अपनी बेचैनी को शब्द हम पहनाएं कैसे|

DT

mausam..

बदली मचल गयी है..
या कोशिश तेरी मेरे ओर आने की
याद दिला रहा है मौसम…
हमे उस बीते ज़माने की
इक पल बीता नहीं तेरे बिन..
आज खबर नहीं अरसा बीत जाने की
क्यूँ मानता नहीं सच्चाई को..
आस है आज भी तेरे घर आने की

DT

mausam

कुछ इस तरह बरसा है मौसम..बस रात है इन आखों में
कुछ इस तरह तनहा है मौसम..बात सिर्फ तेरी मेरी बातों में
तू सुन रही है अगर मुझे..कोई इक इशारा तो दे
जीने का बहाना मिले..शायद तेरे इशारों में
सुना है..आते हैं मौसम चार बीतते इन सालों में
हमारा तो अब एक है मौसम ज़िन्दगी की राहों में

DT

chahat (Shayri)

हर आहट में बस आहट तेरी है…
हर चेहरे में बस सूरत तेरी है..
लोग कहते हैं की तू नहीं है..
हमारी तो हर इबादत में बस चाहत तेरी है!!!

DT

koshish.. (Shayri)

न जाने कितने दिनों बाद लिखने का मन किया है..
न जाने इस बीच मैंने क्या जीया है..
शायद बीत गया एक अरसा एक लम्हा जैसे..
लाऊंगा वो लम्हे अब में वापिस कैसे..
कुछ दर्द मिला होगा उनमें जो वापिस यहाँ हूँ..
देखो मैं आज फिर कुछ लिखने लगा हूँ..
कुछ टूटा सा, कुछ फूटा सा..
एक साथी कहीं कोई छूटा सा..
कोशिश कर रहा हूँ में वो कहानी बताने की..
कोशिश मेरी फिर से है इक शेर बनाने की!

DT

meri tanhai (Shayri)

एक गुजरती हुई शाम बन गयी हो तुम..
जो मदहोश कर दे वो जाम बन गयी हो तुम..
इस कदर तेरी यादों में खोये रहते हैं की..
मेरी तन्हाई का नाम बन गयी हो तुम!

DT

u, me aur hum (Shayri)

गुजर रहे थे हम राहों से..तेरी खुशबु सी आई,
हिम्मत नहीं हुई की तुझे ढूंढ़ सकें..बस जरा आखें भर आई,
इस कदर बसे हो सासों में तुम..शायद ज़िन्दगी भी हमे जुदा न कर पायी

DT