aznabi shaam..

कॉफ़ी के तो बहुत ठिकाने हैं, बस शाम ने ही बात करना छोड़ दिया हमसे..
ज़िन्दगी बस दौड़ते जा रही है, यूँ तो ढून्ढ रहे हैं हम खुदको कबसे|

-DT

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