bahak jana baki hai ( Ghazal )

चले जाना के अभी इस रात का एक पहर बाकि है ,
चले जाना के अभी इस दिल का एक अरमान बाकि है |

धड़कते दिल तड़पते है , मचलते दिल तरसते है ,
चले जाना के अभी इन सब का जल जाना बाकि है |

जिस दिल को संभाले थे , हमने उसको खोया है ,
चले जाना के अभी इस नुकसान का हर्जाना बाकि है |

तेरी आँखों के पैमाने पिए हमने नहीं पुरे ,
चले जाना के अभी किसी का बहक जाना बाकि है |

H.P.RAHI

1 thought on “bahak jana baki hai ( Ghazal )”

  1. hiren sir,i liked this one alot…vese to apke sbhi sheyr achhe hain…keep on writing…we love to read ur shyri…

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