Bemaani

टूटे रोशनदानो, खिडकियों की धुप को ढको जरा
यह पुराने रद्दी अख़बार भी कुछ काम आये
आते जाते नज़र ही पड़ जाये तो
चेहरे को मुस्कान, शायद , आँखों को नमी मिल जाये
कभी खबरों से लाल लाल रहा करते थे
अब उम्र हुयी तो लहू पिला पड़ गया है इनका
अजीब सी बू भी आती है
बूढी अम्मा हमेशा चिल्लाती रहती है
“किसी रद्दी वाले को बेच दो ”
कैसे बेच दू ? इनमे से ही किसी अखबार में
बाबूजी का शोक सन्देश छपा था
मुन्ने का नाम भी आया था
साइंस फेयर में डिस्ट्रिक्ट लेवल पर फर्स्ट जो आया था
फुर्सत रहती नहीं के छाटू और फिर काटू वोह सब खबरे
एक क़र्ज़ भी है इन रद्दी कागजों का मुझ पर
मेरी कई नज्मो का बोझ लिया था इन्होने
जाने कितने मानी , बेमानी से बिखरे पड़े होंगे
सोचता हूँ के कभी मिलेगा वक़्त मुझे जरूर
तो छाटूंगा , काटूँगा सब खबरे
समेटून्गा मानी बिखरे हुए सारे
उस दिन किसी पहाड़ पे जाके राकेट बनाकर उडा दूंगा
और जहाज बना कर जमुना में बहा दूंगा
शायद किसी सुलगती खबर को थोड़ी सी नमी मिल जाये
किसी पुरानी उम्मीद को हवा मिल जाये ।

H.P.RAHI

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