bulldozer

साथ और विकास की ये अजब रस्म निभाते हो
आधे-कच्चे अरमानो पे ये पक्के बुलडोज़र चलाते हो

थोड़ा ही वक़्त गुजरा था की थोड़ा होश ही आता
बुझने को थी नफरते कि फिर वही हवा चलाते हो

सदियों से समझ पे पड़ी धूल थोड़ी हटाते तो
धर्म कर्म के ये कैसे मतलब समझाते हो

तुम्हारी नियत का पता तो था पर दिल मानता नहीं था
हर बात फरेब थी, तुम क़यामत के जाल बिछाते हो|

H.P.RAHI