ek baat yu huyi ( Ghazal )

एक बात यु हुयी ,
सहर के वक़्त शाम हुयी |

वोह धुप का सामान निकला ,
उस और मुड़ा और रात हुयी |

एक ख्वाब सरे आम हुआ ,
एक जुस्तजू नीलाम हुयी |

जब धड़कन की साँस चली ,
एक आह उडी , और राख हुयी |

H.P.RAHI

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