ik baat..

जिनकी बात, जिनसे बात, थी रोज़ कि बात..
उनसे दुआ सलाम का ठिकाना नहीं..
जिनसे बात करते है हम आज रोज़..
क्या वो भी वक़्त के कुछ लम्हे हैं?
DT

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