jangju ( Shayri )

कहा टिकता है कोई जर्रार मेरे सामने , आज दिल जंगजू बहोत है |
रहेगा आसमान भी मेरे कदमो तले , आज परवाज बुलंद बहोत है | H.P.RAHI

जर्रार – बहोत बड़ी सेना , परवाज़ – उडान |

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