kaarwa ghamo ka ( Ghazal )

कारवा गमो का गुजरा था मेरे दर से ,
हमारे हाथो से सागर टूटने से लगे है |

तुम्हारी दुआए हम तक पहुची ही थी ,
जिंदगी और मौत के सिरे छुने से लगे है |

भीगने लगी है जिंदगी की राहें ,
दिलो के जख्म सुबकने से लगे है |

अपने अंजुमन में क्या कमी थी आंसुओ की ,
वक़्त के कुछ और सितम जुड़ने से लगे है |

सागर – शराब का प्याला , अंजुमन – सभा |

H.P.RAHI

Leave a Reply

Your email address will not be published.