koshish.. (Shayri)

न जाने कितने दिनों बाद लिखने का मन किया है..
न जाने इस बीच मैंने क्या जीया है..
शायद बीत गया एक अरसा एक लम्हा जैसे..
लाऊंगा वो लम्हे अब में वापिस कैसे..
कुछ दर्द मिला होगा उनमें जो वापिस यहाँ हूँ..
देखो मैं आज फिर कुछ लिखने लगा हूँ..
कुछ टूटा सा, कुछ फूटा सा..
एक साथी कहीं कोई छूटा सा..
कोशिश कर रहा हूँ में वो कहानी बताने की..
कोशिश मेरी फिर से है इक शेर बनाने की!

DT

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