mausam

कुछ इस तरह बरसा है मौसम..बस रात है इन आखों में
कुछ इस तरह तनहा है मौसम..बात सिर्फ तेरी मेरी बातों में
तू सुन रही है अगर मुझे..कोई इक इशारा तो दे
जीने का बहाना मिले..शायद तेरे इशारों में
सुना है..आते हैं मौसम चार बीतते इन सालों में
हमारा तो अब एक है मौसम ज़िन्दगी की राहों में

DT

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