Numaeesh ( Ghazal )

रेगजारो के दिल की गुलिस्ता क्या जाने ,
बहोत से ख्वाब नुमाइश पर लगा आया हूँ |

दिल ता जिगर तेरी रहगुज़र का मुंतजीर सा हुआ ,
गाफिल वहा हर साँस भूल आया हूँ |

हर रंग मेरा कैस का हर रंग लगे ,
अपनी सूरत के कई नकाब गिरा आया हूँ |

मेरा परवर भी गमगुसार हुआ ,
तेरे फरेब पर एक गर्द बिछा आया हूँ |

रेगज़ार – रेगिस्तान , मुंतजीर – इंतज़ार करने वाला ,
गाफिल – बेहोश , कैस – मजनू , गर्द – धुल |

H.P.RAHI

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