One of My Favourite ( Ghazal )

शुक्रिया के हमारे अंजुमन में आप आए है ,

सब ओर बरस रहे है जलवे , के सरकार आए है |

तुम्ही से रोशन हर महफिल , तुम्ही से रोशन हर लम्हा ,

के आज की शब रौशनी में नहाने यहाँ महताब आए है |

सरफरोशी कि तमन्ना थी हमारे दिल में भी ,

मगर अब करेंगे गुलामी आपकी , के आप शम्मे बहार लाये है |

दास्ताने सिफर सुनाते थे जो पैमाने कभी ,

वोह आज ख़ुद नशे में डूबने कि गुहार लाये है |

अंजुमन – सभा , शब् – रात , महताब – चाँद , सिफर – शुन्य |

H.P.RAHI

1 thought on “One of My Favourite ( Ghazal )”

  1. Mubaraq ho! Mr. Rahi.
    arz kiaa hai…

    koi puchhey tamnaa teri, khwaaish hum bhi rakhtey hain;
    kabhi mile uss khwaishh se tu, arz hum bhi kartey hain…
    kabhi mehfil mein kehtey hain, kabhi zikr khud se kartey hain;
    ya to wah! wah! tum kartey ho, ya hey-raan hum hee rehtey hain.

Leave a Reply

Your email address will not be published.