pata na chala..

इक तेरे इंतज़ार में दर पे दिया जलाये बेठे हैं..
इंतज़ार कुछ इतना हुआ, हुआ दिया हवा पता न चला..
लोग कहते हैं वो न आयेंगे कभी..
ऐसा क्या गुनाह हुआ, हुआ जो पता न चला|
ज़िन्दगी चल रही, कट रही है शायद.
तेरी याद में तेरे इंतज़ार में..
बदला नहीं कुछ भी तेरी गैरमौजूदगी में
बदला जो हुआ तो पता न चला||
DT

2 thoughts on “pata na chala..”

  1. हमें तो जख्मे जिगर का अहसास कम था कुछ ,
    उन्हें खबर हुयी तो हमें पता चला ,
    उफ़ ये तन्हाई बहोत खून लेती है ,
    उन्हें पता चले तो लगे, के पता चला |

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