pehchan..

मैं हवा हूँ..या हूँ माटी?

मैं हूँ जीवन..या हूँ काठी?

मैं ख्याल हूँ..या हूँ सपना?

मैं पराया हूँ..या हूँ अपना?

मैं स्पर्श हूँ..या हूँ चुभन?

मैं मुट्ठी हूँ..या हूँ गगन?

मैं हंसी तेरी..या नमकीन जल?

मैं ज़िन्दगी तेरी..या बस इक पल?

तू जानती नहीं मुझे..या में तुझसे बना?

हर पल है मेरा..कुछ अर्थ नया।

 

– DT

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