Phursat ( Shayri )

बहोत ढूंढता रहता हूँ कुछ पल फुरसत के लेकिन ,
वक़्त उदास सा किसी कौने में छुपा रहता है |
मुझसे नाराज़ है शायद |H.P.RAHI

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