Woh Khat ( Ghazal )

सुबह को तेरा ख़त जो मिला था ,
सहरा में इक फूल खिला था |

तेरी आँखें याद आई थी ,
मयखाने को भूल गया था |

अँधेरा ही हकीकत थी मेरी ,
कोई दीप ले आया वोह तेरा ख़त था |

शाम को मैं फिर मयखाने में हूँ ,
जो मिला था, तेरा कोई पुराना ख़त था |

सहरा – रेगिस्तान

H.P.RAHI

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