Remembering Jagjit Singh JI

Remembering Jagjit Singh JI at Sirifort Auditorium, Delhi with Gulzar, Bhupinder and Mitali.

वोह लम्हा जो धुंधला अब भी मौजूद है ,
कोई धकेल देता है उसे जब आगे ,
मेरे रोंगटे खड़े हो जाते है उस बार की तरह ,
आज भूपिंदर की आवाज़ मुझे फिर वही ले गयी ,
जहा तुमने सिर्फ गुनगुनाया था थोडा सा ,
और पब्लिक ने तुम्हे आगे गाने न दिया ,
खुद गाया था , “होठो से छु लो तुम”,
एक रूहानी सफ़र था वोह ,
और हजारो ने साथ निभाया था | H.P.RAHI

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