shahar wala chand

मेरे शहर की रात वाला , तनहा तनहा चाँद ,
कुछ देर पहले देखा था ,
मेरे घर के सामने एक मंदिर के गुम्बद से लटक रहा था ,
अब रोड के किनारे वाली मस्जिद की छत पर आ गिरा है ,
वहा से लुढ़केगा जरूर कुछ देर में ,
जमीन पर आ गिरेगा तो मैला हो जायेगा ,
सोचता हूँ बुझा दू रात और बचा लू चाँद को ,
या गिरने दू , और छिपा के घर ले आऊ ,
रख लू एक दिन के लिए ,
कल शहर के उजालो से बहोत दूर,
तारो की हिफाज़त में दे आऊंगा , वहा दोस्तों के बीच रहेगा |

H.P.RAHI

2 thoughts on “shahar wala chand”

  1. Raat ki sachai kuch yu bayan kiye, ki din ko rat me tabdeel kar diye

    WAh kya likha hai Rahi sahab….

    Sarkar shabdon me barkat dein aapko

    aur jyada dilon ko chuye aap

Leave a Reply

Your email address will not be published.