syah lamhe

नशे में मैंने चाँद तोड़कर अपनी डायरी में छिपा दिया ,
चाँद चांदनी परोस रहा था, और मैं पि रहा था उस रात तन्हा |
सुबह उठकर देखा तो उस सफ्हे पर एक नज़्म रोशन थी ,
हर अशआर में कैद लम्हे ताक रहे थे मुझे ,
पेन की निब से निकले यह लम्हे , जब जिए थे मैंने , इतने स्याह तो न थे |

H.P.RAHI

1 thought on “syah lamhe”

  1. isliye hi kehte hain..nasha na kiya karo..

    ik chand ka nuksan kar diya tumne..
    kisi ke husn ko lamho mein badal diya tumne..
    tumhari to pen ki nib tod deni chahiye..
    angrezi peeke desi ka kaam kar diya tumne 😛

    DT

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