Woh Khat ( Ghazal )

सुबह को तेरा ख़त जो मिला था ,
सहरा में इक फूल खिला था |

तेरी आँखें याद आई थी ,
मयखाने को भूल गया था |

अँधेरा ही हकीकत थी मेरी ,
कोई दीप ले आया वोह तेरा ख़त था |

शाम को मैं फिर मयखाने में हूँ ,
जो मिला था, तेरा कोई पुराना ख़त था |

सहरा – रेगिस्तान

H.P.RAHI

tareef ( Ghazal )

तेरी आँखों ने यह जो कह दिया ,
बस इसको ही मैंने शायरी नाम रख दिया |

तालियाँ बजी थी , तारीफे थी मेरी ,
तेरा नाम जो मैंने महफिल में कह दिया |

जिस रात दिखा था तेरा चेहरा ,
उस रात को मैंने चौदहवी कह दिया |

तुम भी बन जाओगे मशहूर शायर ,
मेरी तरह जो तुमने उनको सुन लिया |

H.P.RAHI

One of My Favourite ( Ghazal )

शुक्रिया के हमारे अंजुमन में आप आए है ,

सब ओर बरस रहे है जलवे , के सरकार आए है |

तुम्ही से रोशन हर महफिल , तुम्ही से रोशन हर लम्हा ,

के आज की शब रौशनी में नहाने यहाँ महताब आए है |

सरफरोशी कि तमन्ना थी हमारे दिल में भी ,

मगर अब करेंगे गुलामी आपकी , के आप शम्मे बहार लाये है |

दास्ताने सिफर सुनाते थे जो पैमाने कभी ,

वोह आज ख़ुद नशे में डूबने कि गुहार लाये है |

अंजुमन – सभा , शब् – रात , महताब – चाँद , सिफर – शुन्य |

H.P.RAHI

My First Ghazal

सबकी सांसे सबका जीवन , मेरा जीवन तुम ही साजन |

मेरा क्या है , क्या मैं बताऊ , मेरा जीवन तेरा साजन |

भंवरा जैसे फूल बिना है , मेरा जीवन तुम बिन साजन |

देर लगी क्यो तुमको इतनी ,तेरी तलाश में भटका जीवन |

बहुत तलाशा मैंने इसको , तुझमे मिला है मेरा जीवन |

H.P.RAHI