davanal

जहा सिर्फ नफ़रत की फसल कटती है
और दावानल की चिंगारी सिचि जाती है
वो जमींन कौनसी है ?

जहा ढलती है तलवारे उस पवित्र धातु से
जिसमे संभावना थी हल और हंसिया बनने की
वो ईमारत कौनसी है ?

दम्भ और रूढ़ि परम्पराओ, विचारो के शोर में
जहा दिल टूटने की तो आवाज़ तक सुनाई नहीं देती
वो समाज कौनसा है ?

ग़ुरबत जहा सिर्फ एक प्रयोगशाला है
धर्म, धर्म नहीं, जैसे कोई अफीम है
वो चमन कौनसा है ?

उस चमन से मेरा कोई नाता नहीं
उस समाज का मैं बाशिंदा नहीं
उस इमारत की पनाह मुझे मंजूर नहीं
उस जमींन से मेरी जड़े मैंने अब उखाड़ ली

अब असमंजस में हु
कहा जाऊ ?

H.P.RAHI