tasavvur ( Ghazal )

गुमशुदा मिल गया वजुद मेरा ,
सरे राह जो खोया था जानशीं मेरा ।

तिरे जहां में कुछ तो मिला मुझे ए खुदा ,
वोह तसव्वुर के इरादों का नज़ारा मेरा ।

बंदिशे इश्क फ़साने को जाने क्या कहिये ,
बंदिशों का करम ही तो है मुकद्दर मेरा ।

तुमको देखे के शबे आफताब देखे ,
क्या क्या नहीं है आज जमाना मेरा ।

ख़ुशबुओ की चमन को आहट है ,
सुनते रहिएगा आप आज फ़साना मेरा ।

रूबरू देखा जो सहरा-ओ-समंदर मैंने ,
याद आ गया वोह मिलन था जो तुम्हारा मेरा ।

H.P.RAHI

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