tum bin ( Ghazal )

कैसे रहोगे तन्हा हम बिन ,
जी न सकेंगे हम भी तुम बिन |

दिल पर बोझ यादो का इतना ,
मर भी सकेंगे कैसे तुम बिन |

शाम तो कट ही गई पीते पीते ,
जाने कैसे कटेगी यह रात तुम बिन |

‘राही’ भूल रहा है अपनी मंझिल ,
बदले बदले से जो है यह नज़ारे तुम बिन |

H.P.RAHI

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