ummeede mitati chali gayi ( Shayri )

wrote after getting harassed with kota exeperience.

उम्मीदे मिटती चली गयी , रास्ते जलते चले गए ,
जिंदगी का सफ़र चल न पाए हम , हर दिन हर रात मरते चले गए |
उफनती नदिया सागर सी लगने लगी , सुखी हुयी नहरे सहरा सी लगने लगी ,
बिगडे आसान काम भी , हम खुद को ठगते चले गए |H.P.RAHI

सहरा – रेगिस्तान |

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