uuns ( Shayri )

उन्स उठते है तो जिगर के छाले मेरे रो पड़ते है ,
के आग बुझाकर मैं उनपे राख मल देता हूँ ,
मेरी जिंदगी का रंग बहोत धूसर सा लगता है मुझे | H.P.RAHI

1 thought on “uuns ( Shayri )”

Leave a Reply

Your email address will not be published.