yaad

तू याद बहोत आया कल रात ,
और रात थी जो ख़तम ही न हुयी |

ऐसे सितम सहता हूँ हर रात ,
और एक तेरी आमद है , हर बार टलती रही |

एक आहट से भी तेरी जो सुकून मिलता था मुझे ,
वोह आहटे ही मेरे दिल का घाव हुयी |

थोडा और , थोडा और , थोडा और इंतज़ार ,
कुछ ही सासों की बात है , अटकी हुयी | Deeps

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