yu rato me na milne aao ( ghazal )

मेरे मुफलिस तेरे ही दामन में सोया हूँ ,
ख़बर भी नही इतनी गुम हो , क्या मेरे ख्यालो में खोयी हो |

शब् भी बहोत लम्बी सी है ,
इसे तेरे आने की ख़बर है जो |

तन मन में इतना शोर मचा है ,
आज सिने में जैसे दो दिल हो |

तुमको रोकू पहरों पहरों ,
गर महताब पे बस चल जाए तो |

इस जालिम दिल को रोक सकू ,
यु रातों में न मिलने आओ तो |

मुफलिस – निर्धन , शब् – रात ,
महताब – चाँद |

H.P.RAHI

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